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आजीवन पॉलिसी

विशेषताएँ

विशेषताएँ

मूल रूप से यह पॉलिसी धारक के अपने उत्तराधिकारी के लिए संपत्ति का प्रावधान करने की योजना है क्योंकि मूलत: इस पॉलिसी के अंतर्गत बीमित र.कम और बोनस का भुगतान पॉलिसी धारक की मृत्यु के बाद किया जाता है। बहरहाल, भारतवासियों की बढ़ती दीर्घ आयु को देखते हुए निगम ने इस प्रावधान में संशोधन करके पॉलिसी धारक के ८० वर्ष के हो जाने या पॉलिसी की आरंभ तिथि से पॉलिसी की अवधि के ४० वर्ष पूरे होने पर, जो भी बाद में पूरी हो, बीमित र.कम और बोनस परिपक्वता दावे के भुगतान के रूप में दिए जाने का प्रावधान किया है.

इस योजना के अंतर्गत पॉलिसी धारक की आयु ८० वर्ष या पॉलिसी की अवधि ३५ वर्ष तक जो भी देर से पूरी हो, प्रीमियम देय होता है।

अगर पॉलिसी लेने के तीन वर्ष बाद प्रीमियम भुगतान बंद हो जाता है तो घटी हुई बीमित र.कम के लिए पॉलिसी .खुद-ब-.खुद सुरक्षित हो जाती है बशर्ते कि किसी संलग्न बोनस को छोड़ कर घटी हुई बीमित र.कम ढाई सौ रुपये से कम न हो। इस तरह के घटे हुए चुकता मूल्य की पॉलिसी पर उसके बाद बोनस देय नहीं होते। परंतु पॉलिसी के लिए पहले से घोषित बोनस उसके साथ जुड़े रहते हैं। बशर्ते कि पांच साल तक प्रीमियम भरने के बाद पॉलिसी चुकता पालिसी में रूपांतरित कर दी गयी हो।

किसके लिए उपयुक्त है 

पॉलिसी हर आयु के ऐसे लोगों के लिए उपयुक्त है जो अपने परिवार को अपने असामयिक निधन से होने वाली वित्तीय परेशानियों से बचाना चाहते हैं।

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